Yashoda Mata Janmotsav: नंदगांव में माता यशोदा का जन्मोत्सव धूमधाम से संपन्न, नंद बाबा मंदिर में हुए धार्मिक आयोजन

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Yashoda Mata Janmotsav: मथुरा के नंदगांव स्थित प्रसिद्ध नंद बाबा मंदिर और मेहराना के यशोदा धाम में श्रीकृष्ण की पालनहार मां यशोदा का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। नंदगांव से गोस्वामी समाज के लोग मेहराना यशोदा धाम बधाई देने पहुंचे। नंदभवन स्थित यशोदा मैया मंदिर में बधाई गान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और छप्पन भोग का आयोजन हुआ। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने माता यशोदा की पूजा कर संतान सुख और परिवार की समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि यशोदा माता का जन्म मेहराना में हुआ था। यह उत्सव ब्रज संस्कृति में वात्सल्य और प्रेम का अनुपम उदाहरण है। इस अवसर पर सुबह से देर रात तक धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चली। आयोजन के दौरान बधाई गायन हुआ और साधु-संतों सहित हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई।

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माता यशोदा का जन्मोत्सव फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाने की प्राचीन परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए नंदगांव के ब्रजवासियों ने नंदभवन में पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ यह पर्व मनाया। शनिवार सुबह मंदिर में ठाकुरजी का विशेष अभिषेक किया गया, जिसके बाद उन्हें मंगलसूचक पीले वस्त्र धारण कराए गए और छप्पन भोग अर्पित किए गए।

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नंदगांव और बरसाना से आए गोस्वामी समाज के लोगों ने बधाई समाज का सामूहिक गायन किया। इस दौरान “जुरि चली है बधावन सुंदर ब्रज की बाला”, “आज महा मंगल महराने”, “महरि के कपड़ा कोटि लुटत है” और “उमगि उगी जस की धरा, ज़ब जसुधा लियो अवतार” जैसे पारंपरिक पद गूंजते रहे।

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दोपहर में ठाकुरजी की राजभोग आरती के उपरांत साधु-संतों, ब्राह्मणों और श्रद्धालुओं को विशाल भंडारे में प्रसाद वितरित किया गया। इस आयोजन में विशेष योगदान देने वाले दान बिहारी चौधरी (दानो नेता) ने बताया कि इस उत्सव के माध्यम से भक्तों को यशोदा मैया की साक्षात कृपा का अनुभव होता है। रात्रि में फूल बंगला सजाया गया, जहां पुष्पों से सजे ठाकुरजी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

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नंद बाबा मंदिर के पुजारी राम गोस्वामी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य माता देवकी के गर्भ से हुआ था, वहीं महावन में माता यशोदा के उदर से भी नंदलाल ने जन्म लिया था। ब्रज लीला में दोनों स्वरूप एक होकर प्रकट हुए। उन्होंने यह भी बताया कि जब महावन (गोकुल) में कंस के अत्याचार बढ़ने लगे, तब नंदबाबा अपने परिवार सहित अपने पूर्वजों के गांव नंदगांव आकर बस गए थे।

नंदगांव के समीप स्थित महराना गांव माता यशोदा की जन्मस्थली मानी जाती है, जहां उनका जन्म सुमुख गोप और पटुला देवी के घर हुआ था।

यह भी पढ़ें: जन भवन में फूल-फलों की अनोखी प्रदर्शनी: चार फीट की लौकी बनी आकर्षण, जैविक खेती का संदेश

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