भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा का 93 वर्ष की आयु में निधन, राजनीतिक जगत में शोक

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पाँच बार सांसद रहे प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 30 सितंबर की सुबह एम्स, नई दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक जगत, विशेषकर भाजपा परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। उन्हें भाजपा के संगठनात्मक स्तंभों में से एक और दिल्ली की राजनीति का मज़बूत आधार कहा जाता है।

भाजपा विधायक हरीश खुराना ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “यह न केवल भाजपा के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वे पार्टी के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति थे। हमने एक पितातुल्य व्यक्ति को खो दिया है।”

इसी क्रम में भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी उनके निधन को “अपूरणीय क्षति” बताया और कहा कि मल्होत्रा का योगदान पार्टी की वैचारिक और संगठनात्मक नींव में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। सचदेवा ने स्मरण किया कि भारतीय जनसंघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भाजपा के संस्थापक चार्टर पर उनके हस्ताक्षर दर्ज हैं।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने उन्हें आधुनिक दिल्ली की आधारशिला रखने वाला नेता बताते हुए कहा, “प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा थे। उन्होंने दिल्ली को जिस रूप में विकसित किया, वही आज की राजधानी की पहचान है।”

प्रो. मल्होत्रा का जन्म 3 दिसंबर, 1931 को लाहौर, पंजाब, ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था। राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका 1970 के दशक से शुरू हुई। वे 1972 से 1975 के बीच दिल्ली प्रदेश जनसंघ के अध्यक्ष रहे। आपातकाल के बाद उन्होंने 1977 से 1984 तक दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष के रूप में पार्टी को मज़बूती प्रदान की। उनकी अगुवाई में भाजपा ने दिल्ली में संगठनात्मक रूप से गहरी जड़ें जमाईं।

उनकी राजनीतिक यात्रा कई उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरी रही। 1999 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बड़े अंतर से पराजित कर इतिहास रच दिया। इसके बाद 2004 के आम चुनाव में वे दिल्ली में भाजपा के एकमात्र विजयी उम्मीदवार बने। इसके अतिरिक्त वे दो बार दिल्ली विधानसभा के लिए भी चुने गए।

मल्होत्रा को हमेशा एक स्वच्छ और बेदाग छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा। हिंदी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त एक शिक्षाविद होने के साथ-साथ वे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। राजनीति से इतर, वे खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे और दिल्ली में शतरंज व तीरंदाजी क्लबों के संवर्धन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केदार नाथ साहनी और मदन लाल खुराना जैसे दिग्गज नेताओं के साथ मिलकर प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने दशकों तक दिल्ली में भाजपा की स्थिति मज़बूत बनाए रखी। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक मार्गदर्शक, रणनीतिकार और आदर्शवादी नेता के रूप में रही।

उनके निधन से भाजपा ने न केवल अपने एक वरिष्ठ मार्गदर्शक को खोया है, बल्कि भारतीय राजनीति ने भी एक ऐसे नेता को खोया है जिसने पारदर्शिता, आदर्श और सेवा को अपना ध्येय बनाया था।

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