India–US Trade Deal: जयशंकर की अमेरिका यात्रा में टैरिफ कटौती, ऊर्जा-रक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ी प्रगति

जयशंकर

Share This Article

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका पहुंचे हैं। इस दौरे के दौरान मंगलवार को उन्होंने अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं का केंद्र भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लागू करने, टैरिफ में कटौती, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करना रहा।

जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी अमेरिका यात्रा की शुरुआत ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात के साथ की। यह बैठक नए आर्थिक समझौते को जमीन पर उतारने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को व्यापार समझौते के व्यावहारिक ब्योरे तय करने और आर्थिक सहयोग को गति देने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर उपयोगी चर्चा हुई।

इसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ शामिल रहे। रुबियो ने बैठक का स्वागत करते हुए कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और नए आर्थिक अवसर खोलने पर विशेष फोकस रहा। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस व्यापार समझौते को रोजगार सृजन, आर्थिक वृद्धि और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देने वाला कदम बताया। क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग जयशंकर की वॉशिंगटन बैठकों का प्रमुख और रणनीतिक विषय बना रहा।

भारतीय उत्पादों पर अमेरिका की ओर से कुल मिलाकर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था। यह टैरिफ पिछले वर्ष 27 अगस्त से प्रभावी था। इसमें दो हिस्से शामिल थे—

पहला, 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ यानी पारस्परिक शुल्क, और दूसरा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल आयात करने को लेकर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में लागू किया था। इस तरह भारतीय सामानों पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा रहा था।

फिर भ्रम की स्थिति कैसे बनी?

सोमवार को जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनने की खबर सामने आई, तो बताया गया कि अमेरिकी टैरिफ में भारत को 7 प्रतिशत की राहत दी गई है। इसी आधार पर कुछ लोगों ने यह मान लिया कि अब अमेरिका 50 प्रतिशत में से 7 प्रतिशत घटाकर 43 प्रतिशत टैरिफ वसूलेगा। यहीं से असमंजस पैदा हुआ।

असलियत क्या है—50% भी नहीं, 43% भी नहीं

अब सही गणना समझना जरूरी है। भारत अगर रूस से तेल आयात बंद करने का निर्णय लेता है तो जुर्माने के रूप में लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसके बाद केवल 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ बचता है।

इस 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ में से भारत को 7 प्रतिशत की राहत मिली है, जिससे यह घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर देखें तो भारत को 25 प्रतिशत जुर्माना टैरिफ और 7 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ में राहत मिली, यानी कुल 32 प्रतिशत की राहत के बाद अब भारतीय सामानों पर केवल 18 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा।

यह भी पढ़ें: ब्रह्मोस से भी घातक भारत की नई मिसाइल… समंदर में दुश्मन के लिए काल बनेगी LR-AShM

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

Are You Satisfied DD News UP

Also Read This