नई दिल्ली: मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि India economic growth की गति मजबूत हुई है और महंगाई में भी उल्लेखनीय कमी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़े वित्त वर्ष 2026 (FY26) तक मजबूत घरेलू मांग, निवेश में तेजी और कीमतों के दबाव में स्पष्ट गिरावट की ओर इशारा करते हैं। सीईए के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था कोविड-पूर्व औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। रियल जीडीपी ग्रोथ में लगातार सुधार दर्ज किया गया है और आने वाले वित्त वर्ष में इसके और मजबूत होने का अनुमान है।
रियल GDP ग्रोथ में लगातार सुधार
FY26 में 7.4 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए सीईए नागेश्वरन ने बताया कि रियल जीडीपी ग्रोथ FY12 से FY20 के बीच औसतन 6.4 प्रतिशत रही थी। इसके बाद FY25 में यह 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गई और FY26 में इसके 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि यदि हाल के वर्षों की तुलना कोविड-पूर्व अवधि से की जाए तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है। कोविड से पहले भारत की औसत रियल जीडीपी ग्रोथ 6.4 प्रतिशत थी, जबकि FY25 में यह इससे ऊपर रही और FY26 में इसके और तेज होने की उम्मीद है। यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने महामारी के असर से उबरते हुए स्थिर और टिकाऊ वृद्धि की राह पकड़ ली है।
घरेलू मांग बनी ग्रोथ की रीढ़
खपत और निवेश दोनों से मिल रहा समर्थन
सीईए ने कहा कि India economic growth वृद्धि को मजबूत घरेलू बुनियादी कारकों का सहारा मिल रहा है, जिनमें निजी खपत और निवेश प्रमुख हैं। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की ग्रोथ FY12–FY20 के दौरान औसतन 6.8 प्रतिशत थी, जो FY25 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई। FY26 में इसके थोड़ा घटकर 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन यह अब भी मजबूत खपत मांग को दर्शाता है। निवेश के मोर्चे पर भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। रियल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) ग्रोथ FY12–FY20 के औसत 6.3 प्रतिशत से बढ़कर FY25 में 7.1 प्रतिशत हो गई है। FY26 में इसके और तेज होकर 7.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह लगातार पूंजी निर्माण और भविष्य की वृद्धि के लिए मजबूत आधार को दिखाता है।
महंगाई में बड़ी राहत | India economic growth
हेडलाइन और कोर दोनों महंगाई में गिरावट
महंगाई के मोर्चे पर सीईए नागेश्वरन ने कहा कि कीमतों का दबाव बीते कुछ वर्षों में काफी कम हुआ है। हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई FY23 में 6.7 प्रतिशत थी, जो FY24 में घटकर 5.4 प्रतिशत हो गई। FY25 में यह और कम होकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, FY26 में दिसंबर तक महंगाई 1.7 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई है, जो एक बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे आम उपभोक्ताओं पर बोझ कम हुआ है और नीति निर्माताओं को भी राहत मिली है। कोर महंगाई, जिसमें सोना और चांदी शामिल नहीं होते, उसमें भी गिरावट दर्ज की गई है। यह FY23 में 6.1 प्रतिशत थी, जो FY25 में घटकर 3.0 प्रतिशत हो गई। FY26 में दिसंबर तक इसमें हल्की बढ़ोतरी के साथ यह 2.9 प्रतिशत रही, लेकिन कुल मिलाकर कीमतों का दबाव नियंत्रित बना हुआ है।
राजकोषीय घाटे में लगातार कमी
बेहतर अनुशासन की ओर बढ़ता भारत
सीईए ने पिछले कुछ वर्षों में राजकोषीय घाटे में आई निरंतर कमी पर भी जोर दिया। FY21 में यह 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद FY22 में यह घटकर 6.7 प्रतिशत, FY23 में 6.5 प्रतिशत और FY24 में 5.5 प्रतिशत रह गया। FY25 के संशोधित अनुमान (RE) के अनुसार राजकोषीय घाटा 4.8 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि FY26 के बजट अनुमान (BE) में इसे और कम कर 4.4 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। सीईए के मुताबिक, प्राइमरी घाटे में भी लगातार गिरावट आई है, जो बेहतर राजकोषीय प्रबंधन और अनुशासन का संकेत है।
टैक्स राजस्व में मजबूती
डायरेक्ट टैक्स बेस का तेजी से विस्तार
आर्थिक सर्वेक्षण में राजस्व प्रदर्शन को भी मजबूत बताया गया है। सीईए ने कहा कि कर संग्रह में लगातार तेजी आई है और डायरेक्ट टैक्स बेस का दायरा बढ़ा है। FY16–FY20 के दौरान सकल कर राजस्व जीडीपी के औसतन 10.8 प्रतिशत के बराबर था, जो महामारी के बाद की अवधि (FY22–FY25) में बढ़कर 11.5 प्रतिशत हो गया। व्यक्तिगत आयकर संग्रह में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। महामारी से पहले के वर्षों में यह जीडीपी का लगभग 2.4 प्रतिशत था, जो महामारी के बाद बढ़कर 3.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बेहतर अनुपालन और आय में वृद्धि का संकेत देता है।
आयकरदाताओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता कदम
टैक्स बेस के विस्तार को रेखांकित करते हुए सीईए ने बताया कि आयकरदाताओं की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। FY22 में जहां आयकरदाताओं की संख्या 6.9 करोड़ थी, वहीं FY25 में यह बढ़कर 9.2 करोड़ हो गई। यह बढ़ोतरी बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल प्रणालियों के विस्तार और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण को दर्शाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे सरकार के राजस्व आधार को मजबूती मिली है और सार्वजनिक निवेश के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं।
सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार
पूंजीगत व्यय पर बढ़ा जोर
खर्च के मोर्चे पर भी सरकार की रणनीति में बदलाव देखने को मिला है। सीईए ने कहा कि सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और पूंजीगत व्यय पर विशेष ध्यान दिया गया है। महामारी से पहले की अवधि में प्रभावी पूंजीगत व्यय जीडीपी के लगभग 2.7 प्रतिशत के बराबर था, जो महामारी के बाद बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गया है। पूंजीगत व्यय में यह बढ़ोतरी बुनियादी ढांचे, परिवहन, ऊर्जा और अन्य विकासोन्मुख क्षेत्रों में निवेश को दर्शाती है। इसका असर रोजगार सृजन, उत्पादकता में वृद्धि और दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर पड़ने की उम्मीद है।