युद्ध जैसी आपात स्थिति या आतंकी हमले के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा, घायलों का रेस्क्यू और हालात पर तुरंत काबू पाने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को UP के गोरखपुर, बलरामपुर, सीतापुर और शाहजहांपुर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिसमें सिविल डिफेंस के साथ भारतीय वायुसेना, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन ने आपसी समन्वय का शानदार प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल के दौरान चेतावनी सायरन, ब्लैकआउट, डमी विस्फोट, घायलों का रेस्क्यू और उन्हें सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने तक हर उस स्थिति का अभ्यास किया गया, जो किसी भी आपदा के वक्त जान बचाने में निर्णायक साबित होती है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर पराक्रम दिवस
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस मनाने के लिए नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 23 जनवरी को पुलिस लाइन में ब्लैकआउट मॉकड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें शाम छह बजे से नागरिकों से अपील की गई कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद रखें।
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डीएम ने की मॉकड्रिल की तैयारियों की समीक्षा
बलरामपुर डीएम विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को संबंधित विभागों के साथ बैठक हुई। बैठक में निर्देश दिए गए कि ब्लैकआउट अभ्यास का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और स्वयंसेवकों व सिविल डिफेंस वार्डनों के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जाए। जिला आपातकालीन प्रतिक्रिया दल को पूरी तरह सक्रिय रखने और त्वरित समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
भीड़भाड़ वाले इलाके में ब्लैकआउट मॉकड्रिल
जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि वीर विनय चौराहे जैसे अत्यधिक भीड़ वाले सार्वजनिक स्थल पर मॉकड्रिल आयोजित करने का उद्देश्य यह था कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभ्यास को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें। इसके माध्यम से नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में अपनाए जाने वाले सही व्यवहार और सावधानियों की व्यवहारिक जानकारी दी गई, ताकि आपदा प्रबंधन की तैयारियों में जनभागीदारी को मजबूत किया जा सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह ब्लैकआउट मॉकड्रिल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जन सुरक्षा से जुड़ी एक अहम तैयारी है। उन्होंने कहा कि अभ्यास का मकसद लोगों को मानसिक रूप से तैयार करना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक घबराने के बजाय तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार सही और जिम्मेदार प्रतिक्रिया दे सकें।
ब्लैकआउट मॉकड्रिल में किए गए अभ्यास
मॉकड्रिल के दौरान सायरन बजाकर अलर्ट जारी किया और इसके बाद ब्लैकआउट लागू हुआ। अभ्यास में आग लगने की स्थिति, खोज और बचाव, प्राथमिक उपचार और गंभीर घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाना जैसे अभ्यास चरणबद्ध तरीके से कराए गये। इसमें पुलिस, नागरिक सुरक्षा, विद्युत विभाग, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग और आपदा मित्र शामिल रहे।
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नागरिकों से विशेष अपील की गयी
सिविल डिफेंस विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि 23 जनवरी को शाम छह बजे से घरों की लाइट, इन्वर्टर, टॉर्च और मोबाइल फ्लैशलाइट का प्रयोग न करें, ताकि बाहर किसी प्रकार की रोशनी दिखाई न दे। लोगों से निर्देशों का पालन करते हुए घरों में रहने की सलाह दी गई है।
बैठक में प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे
बैठक में सीडीओ हिमांशु गुप्ता, अपर जिलाधिकारी न्यायिक शिव नारायण सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
शाहजहांपुर में हवाई हमले से बचाव का मॉकड्रिल
शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट परिसर में हवाई हमलों से निपटने के लिए मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। शाम छह बजे अचानक लाइटें बंद कर दी गईं और सायरन बजते ही कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्र में दस मिनट का ब्लैकआउट लागू हुआ। इस दौरान कर्मचारियों ने कार्यालयों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और दमकल विभाग ने आग बुझाने का अभ्यास किया। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इस मॉकड्रिल को सफल बताया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर विशेष अभ्यास
यह मॉकड्रिल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश में दिए गए निर्देशों के तहत आयोजित की गई थी। शाहजहांपुर में सिविल डिफेंस का गठन किया गया है और मॉकड्रिल की सफलता सुनिश्चित करने के लिए दो दिन पहले से बैठकें और तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने स्वयं इस अभ्यास की निगरानी की।
पुलिस, दमकल और वालंटियरों की सक्रिय भूमिका
मॉकड्रिल में पुलिस प्रशासन के अधिकारी, दमकल विभाग और कई वालंटियर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद थे। पानी के टैंकर भी तैनात किए गए थे। निर्धारित समय पर कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में ब्लैकआउट किया गया, जिससे पूरे परिसर में अंधेरा छा गया। यह अभ्यास हवाई हमले जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का हिस्सा था।
अभ्यास में बचाव और आपातकालीन गतिविधियां
ब्लैकआउट के दौरान दमकल विभाग ने कलेक्ट्रेट में लगी ‘आग’ को बुझाया और कार्यालयों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान कर्मचारियों और वालंटियरों ने ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाजें भी दीं, ताकि वास्तविक स्थिति का अनुभव लिया जा सके।
जिलाधिकारी ने मॉकड्रिल का उद्देश्य बताया
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपात स्थिति में सायरन बजाना, ब्लैकआउट लागू करना और सरकारी मशीनरी, एंबुलेंस तथा दमकल विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के समन्वय को परखना था। उन्होंने यह भी बताया कि जनता और वालंटियरों का सहयोग कैसे लिया जाएगा और आपात स्थिति में उनका योगदान क्या होगा।
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