आजमगढ़ जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर अभियुक्तों, अभिषेक गुप्ता और शाश्वत अवस्थी को गिरफ्तार किया। ये अभियुक्त टेलीग्राम के माध्यम से चीनी साइबर अपराधियों के लिए काम कर रहे थे। पुलिस ने उनके कब्जे से 6 लाख 32 हजार 320 रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, 12 ATM कार्ड, 9 चेकबुक, 2 पासबुक, स्कॉर्पियो वाहन, नेपाल का विदेशी सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। इस गिरोह ने ‘WOO COMMERCE’ नामक कंपनी के लिए प्रोडक्ट बूस्ट करने के नाम पर ग्राहकों से ठगी की थी और 12 लाख 64 हजार 249 रुपये की रकम भारतीय बैंक खातों में जमा कराई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने ठगी की रकम को USDT क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीनी हैंडलरों को भेजा। मुख्य अभियुक्त अभिषेक गुप्ता ने 10-15 करोड़ रुपये की रकम क्रिप्टो करेंसी में बदल दी।
साइबर ठगी का तरीका: चीनी हैंडलरों के संपर्क में थे आरोपी
आजमगढ़ की पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी चीनी साइबर हैंडलरों के संपर्क में रहकर काम कर रहे थे। इन आरोपियों ने क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल कर भारतीय नागरिकों से ठगी की रकम को चीनी हैंडलरों के पास भेजा। अब तक इन आरोपियों द्वारा 15 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह पूरी साजिश एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का हिस्सा थी।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों ने ठगी के इस काम को भारतीय बैंक खातों के माध्यम से अंजाम दिया। पैसे को पहले भारतीय खातों में ट्रांसफर किया गया, फिर एटीएम और चेक के माध्यम से नगद निकासी की गई और उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीनी हैंडलरों तक भेजा गया।

ठगी की शुरुआत कैसे हुई: एक शिकायत से खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब आजमगढ़ जिले के रौनापार थाना क्षेत्र के निवासी भूपेंद्र नाथ यादव ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके बेटे आर्यन यादव का मोबाइल नंबर एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था, जिसमें खुद को WOOCOMMERCE कंपनी से संबंधित बताकर ऑनलाइन प्रोडक्ट की बिक्री और मार्केट वैल्यू बढ़ाने का काम कराया गया था। इसके बदले अधिक मुनाफे का झांसा देकर आरोपी ने 12 लाख 64 हजार रुपये की ठगी की।
इस शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने जांच शुरू की और त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले 27 अक्टूबर को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में लखनऊ के गुडंबा क्षेत्र से दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी और बरामदगी: 6 लाख रुपये और कई अहम सामान
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए। इन सामानों में 6 लाख 32 हजार रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, 12 एटीएम कार्ड, एक विदेशी सिम कार्ड, चेक बुक, एक कैश काउंटिंग मशीन और एक हूटर लगी काली स्कॉर्पियो शामिल हैं। यह स्कॉर्पियो हूटर लगी थी, जिससे आरोपियों ने कई बार पुलिस की निगाहों से बचते हुए अपनी गतिविधियों को अंजाम दिया।
साइबर पुलिस ने इस कार्रवाई में महत्त्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है, लेकिन मामले में अन्य आरोपियों की तलाश अब भी जारी है। एसपी चिराग जैन ने कहा कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है।
यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और बर्फीली हवाओं से परेशानी, राहत की उम्मीद
मुख्य आरोपी और गैंग
मुख्य आरोपी अभिषेक गुप्ता, जो लखनऊ के जानकीपुरम का निवासी है, इस गिरोह का मुख्य संचालक था। इसके अलावा शाश्वत अवस्थी, जो लखनऊ के इंदिरा नगर का निवासी है, ये भी गिरोह का महत्वपूर्ण सदस्य था। पुलिस की टीमें अब अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हैं।
साइबर पुलिस की बड़ी सफलता
इस मामले में साइबर पुलिस के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह, निरीक्षक विभा पाण्डेय, सब इंस्पेक्टर योगेंद्र प्रसाद, सुखनंदन यादव, सभाजीत मौर्य और एजाज खान की अहम भूमिका रही। उनके नेतृत्व में साइबर पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क को सुलझाया और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में सफलता पाई।
यह कार्रवाई यह साबित करती है कि साइबर अपराधों के खिलाफ यूपी पुलिस का संकल्प मजबूत है और अपराधियों को पकड़ने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है। साइबर ठगी से पीड़ित लोग अब उम्मीद कर सकते हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा और ऐसे अपराधों को जड़ से समाप्त किया जाएगा।