प्रधानमंत्री मोदी ने 28वें CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन किया, संसदीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने पर जोर

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आज, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPoC) का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन के तरीकों पर चर्चा करना और इस क्षेत्र में आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और अद्वितीय होती है।

संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्ष की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान कहा कि अध्यक्ष का कार्य केवल संसद में बैठने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका कार्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि धैर्य और संतुलन अध्यक्षों का सबसे आम गुण होता है, जो शोर मचाने वाले और उत्साही सांसदों को भी शांति से संभालने में मदद करता है।

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भारत के लोकतांत्रिक विकास का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की सफलता पर चर्चा करते हुए कहा कि देश ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी विविधता को अपनी ताकत बना लिया है। उन्होंने कहा कि जब भारत को स्वतंत्रता मिली थी, तब यह आशंका जताई गई थी कि भारत जैसे विविधता से भरे देश में लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा। लेकिन भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं देश में स्थायित्व, गति और व्यापकता ला सकती हैं।

भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत में यूपीआई के माध्यम से दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली स्थापित की गई है और देश सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है। इसके साथ ही, भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और विमानन बाजार है।

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भारत में लोकतंत्र का सफल कार्यान्वयन

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की सफलता का एक उदाहरण है।

पीएम ने यह भी कहा कि भारत में जनता की आकांक्षाओं और सपनों को प्राथमिकता दी जाती है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं की मदद से बिना किसी रुकावट के अपने अधिकारों का उपयोग कर सके। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा किए गए प्रयासों का उदाहरण दिया, जब भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए।

2024 के आम चुनाव और महिला मतदाताओं की भागीदारी, राष्ट्रमंडल से जुड़े 20 से अधिक देशों का दौरा

प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। इस चुनाव में लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था, और 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक दल चुनावों में शामिल हुए थे। इस चुनाव में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी देखी गई, जो भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल से जुड़े 20 से अधिक देशों का दौरा करने के अवसर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें कई संसदों को संबोधित करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वे जहां भी गए, बहुत कुछ सीखा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें जो भी सर्वोत्तम अभ्यास देखने को मिलता है, उसे वे लोकसभा अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ साझा करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन सीखने और साझा करने की प्रक्रिया को और समृद्ध करेगा। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

भारतीय लोकतंत्र की विविधता और समृद्धि

प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र की विविधता और समृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा समाज है जो अपनी भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधताओं को सहजता से प्रबंधित करता है। उन्होंने बताया कि भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं और 900 से अधिक टेलीविजन चैनल और हजारों समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बहुत कम समाज इतनी व्यापक विविधता का प्रबंधन कर पाते हैं लेकिन भारत इस विविधता का जश्न मनाता है क्योंकि यहां के लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारत के लोकतंत्र की तुलना गहरी जड़ों वाले एक विशाल वृक्ष से करते हुए, उन्होनें भारत की वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की लंबी परंपरा पर बल दिया और याद दिलाया कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के 5,000 वर्ष से अधिक पुराने पवित्र ग्रंथों और वेदों में उन सभाओं का उल्लेख है जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने और विचार-विमर्श एवं सहमति के बाद निर्णय लेने के लिए एकत्रित होते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है, जहां बौद्ध संघ खुली और सुनियोजित चर्चाएं करता था और सर्वसम्मति या मतदान के माध्यम से निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने तमिलनाडु के एक 10वीं शताब्दी के शिलालेख का भी उल्लेख किया जिसमें एक ग्राम सभा का वर्णन है जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर काम करती थी, जिसमें जवाबदेही और निर्णय लेने के लिए स्पष्ट नियम थे। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, “समय-समय पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कसौटी पर परखा गया है, विविधता ने इन्हें सहारा दिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी ये मजबूत होते गए हैं।”

वैश्विक सहयोग और राष्ट्रमंडल देशों के विकास में भारत का योगदान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा राष्ट्रमंडल देशों के विकास में योगदान देने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया है। जी20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत ने विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता दी और सुनिश्चित किया कि नवाचारों का लाभ इन देशों को मिले।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मेलन के उद्घाटन में भारतीय लोकतंत्र की सफलता और स्थिरता को उजागर किया। उन्होंने भारतीय संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया, विविधता और समावेशिता को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही, उन्होंने संसदीय लोकतंत्र के महत्व और अध्यक्षों की भूमिका को भी रेखांकित किया। 28वें सीएसपीओसी सम्मेलन का आयोजन भारत के लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. तुलिया एकसन, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टोफर कलीला सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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