उत्तर प्रदेश में शहद उत्पादन को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने प्रदेश में उत्पादित शहद को ‘काशी शहद’ के नाम से ब्रांड करने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के शहद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशिष्ट पहचान दिलाना और मौनपालकों (मधुमक्खी पालकों) की आय में वृद्धि करना है। यह निर्देश बुधवार को लखनऊ उद्यान निदेशालय में आयोजित एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दिए गए। कार्यक्रम में प्रदेशभर से मौनपालक, विभागीय अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।
पहचान के अभाव में पिछड़ रहा यूपी का शहद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश शहद उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, इसके बावजूद प्रदेश के शहद को वह पहचान नहीं मिल पाई है, जिसकी वह क्षमता रखता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यहां का शहद अलग-अलग नामों और ब्रांडों से बाजार में बेचा जाता है, जिससे एक सशक्त और भरोसेमंद पहचान नहीं बन पाती।
प्रेक्षागृह, उद्यान निदेशालय, लखनऊ में आयोजित उद्यान विभाग द्वारा एक दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ। कार्यक्रम में मौनपालन के माध्यम से कृषकों की आयवृद्धि, प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं… pic.twitter.com/XDlEtxZAYQ
— Dinesh Pratap Singh (@RBLDineshSingh) January 7, 2026
उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का शहद एक ही ब्रांड नेम ‘काशी शहद’ के अंतर्गत बाजार में आएगा, तो इससे उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपी के शहद को अलग पहचान मिलेगी। ‘काशी’ नाम भारत की सांस्कृतिक विरासत, शुद्धता और परंपरा का प्रतीक है, जो ब्रांड वैल्यू को मजबूत करेगा।
वैज्ञानिक मौनपालन पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, पुणे के विशेषज्ञ सरविन सिंह तरार ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मौनपालकों को मधुमक्खियों में रोग प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता वाला शहद उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक और प्रभावी विपणन के तरीकों के बारे में बताया।
विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर न केवल शहद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है, बल्कि उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। इससे निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव (उद्यान) बी.एल. मीणा ने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मौनपालन न केवल किसानों की आय बढ़ाने का साधन है, बल्कि इससे फसलों में परागण बेहतर होता है, जिससे कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
राज्य सरकार मौनपालन को ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम मानते हुए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। ‘काशी शहद’ ब्रांडिंग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उत्कृष्ट मौनपालकों का सम्मान
इस अवसर पर मौनपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के विभिन्न जिलों के मौनपालकों को सम्मानित भी किया गया। इनमें गोरखपुर के राजू सिंह, गाजियाबाद के संजीव कुमार तोमर, बाराबंकी के निमित सिंह, मेरठ के सुनील कुमार अहलावत, हरदोई के ओम प्रकाश मौर्य और लखनऊ के बृजेश कुमार वर्मा शामिल थे। सभी को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम, हाफेड के चेयरमैन नवलेश प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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वैश्विक बाजार की ओर यूपी का शहद
‘काशी शहद’ ब्रांडिंग के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का शहद गुणवत्ता, शुद्धता और भरोसे का प्रतीक बने। इससे न केवल घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपी के शहद को नई पहचान मिलेगी, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के मौनपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।







