Bhopal: भोपाल में आयोजित हुआ संस्कृत क्रिकेट टूर्नामेंट, खेल में भारतीय संस्कृति और भाषा का अनूठा संगम

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Bhopal: भोपाल में इस समय एक अद्भुत क्रिकेट टूर्नामेंट देखने को मिल रहा है, जहां क्रिकेट का आनंद लिया जा रहा है, लेकिन खेल की भाषा और खिलाड़ियों की वेशभूषा में भारतीय संस्कृति की झलक साफ़ नजर आती है। यह आयोजन है महर्षि मैत्री क्रिकेट श्रृंखला-6, जो न केवल क्रिकेट के दीवाने दर्शकों के लिए रोमांचक है, बल्कि संस्कृत भाषा और भारतीय परंपराओं को भी प्रोत्साहित करने वाला है।

इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनोखा स्वरूप है। यहां खेल की कमेंट्री पारंपरिक संस्कृत में हो रही है, जो इसे और भी रोचक बनाता है। उदाहरण के लिए, जब कोई खिलाड़ी चौका मारता है, तो कमेंटेटर “चतुष्कम्” के शब्दों में अपनी खुशी का इज़हार करता है, और जब छक्का लगता है, तो “षठकम्” के साथ मैदान गूंज उठता है। यह सुनकर दर्शकों को एक अलग ही अनुभव होता है।

संस्कृत में क्रिकेट की शब्दावली

इस क्रिकेट टूर्नामेंट की एक और दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट की सभी सामान्य शब्दावली को संस्कृत में परिवर्तित किया गया है। मैदान पर खिलाड़ियों को वल्लक: (बल्ले), गेन्दक: (गेंदबाज), धावनम् (रन), क्षिप्या (पिच), निर्णायक: (अंपायर), चतुष्कम् (चौका), षठकम् (छक्का) जैसे संस्कृत शब्दों के माध्यम से निर्देशित किया जाता है। यह न केवल खिलाड़ियों के लिए, बल्कि दर्शकों के लिए भी एक नया अनुभव है, जो भारतीय संस्कृति और संस्कृत के प्रति सम्मान और प्रेम को दर्शाता है।

कमेंट्री का अनोखा तरीका

संस्कृत में कमेंट्री करना न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि दर्शकों के लिए भी एक अलग अनुभव बनाता है। जब कोई खिलाड़ी गेंद को मारता है या रन बनाता है, तो कमेंटेटर उन क्रियाओं को संस्कृत में शानदार तरीके से व्यक्त करता है, जो क्रिकेट के रोमांच को और भी बढ़ा देता है। जब कोई खिलाड़ी छक्का मारता है, तो कमेंटेटर “षठकम्” चिल्लाते हुए मैदान में उत्साह फैलाते हैं। यह देखना दिलचस्प है कि कैसे क्रिकेट जैसे पश्चिमी खेल को भारतीय संस्कृति में रचा-बसा जा रहा है।

टूर्नामेंट का उद्देश्य

महर्षि मैत्री क्रिकेट श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य केवल क्रिकेट का आयोजन करना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना भी है। आयोजकों का मानना है कि इस आयोजन से ना केवल खेल का आनंद लिया जाएगा, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी नया जीवन मिलेगा। इस टूर्नामेंट के आयोजन में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ी पारंपरिक भारतीय परिधान धोती और कुर्ता पहनकर मैदान पर उतरे हैं, और उनका आपसी संवाद भी संस्कृत में ही हो रहा है।

आयोजन का महत्व

इस अनूठे टूर्नामेंट में कुल 27 टीमें भाग ले रही हैं, जिसमें देशभर के क्रिकेट प्रेमी भागीदार हैं। यह आयोजन मध्य प्रदेश के अंकुर खेल मैदान पर हुआ है, जहां खिलाड़ी पारंपरिक वेशभूषा में खेलते हुए भारतीय संस्कृति को प्रकट कर रहे हैं। यह आयोजन वैदिक ब्राह्मण युवा खेल कल्याण समिति और परशुराम कल्याण बोर्ड द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

पंडित विष्णु राजोरिया ने इस आयोजन के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह टूर्नामेंट भारतीय संस्कृति और संस्कृत को बढ़ावा देने का एक प्रयास है। विजेता टीम को 21,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा, जो इस आयोजन को और भी आकर्षक बनाता है।

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