लखनऊ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद द्वारा पारित विकसित भारत – जी राम जी बिल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बिल गांवों, गरीबों, किसानों और मजदूरों के जीवन में निर्णायक बदलाव लाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि अब ग्रामीण मज़दूरों को पहले की तुलना में ज्यादा दिनों का रोजगार मिलेगा और गांवों के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव दिखाई देगा। उनके अनुसार यह कदम उस दिशा में है जहां भारत की पहचान वैश्विक मंच पर और मज़बूत हो रही है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा प्रेरणा स्थल समर्पित करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्मारक के रूप में इसकी अवधारणा रखी गई, जो नेतृत्व, सेवा और राष्ट्र गौरव की भावना को मजबूत करता है।
विकसित भारत – जी राम जी बिल: ग्रामीण मजदूरों के लिए बड़े बदलाव का दावा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभा में कहा कि संसद में पारित विकसित भारत – जी राम जी बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मंजूरी मिल चुकी है। उनके अनुसार यह कानून पहले से चल रही रोजगार योजना में कई सुधार लाता है। पहले ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का रोजगार मिलता था, लेकिन अब इस बिल के लागू होने के बाद 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। उनके अनुसार यह कदम न केवल आर्थिक मदद देगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की भागीदारी और आय दोनों बढ़ाएगा।
सिंह के मुताबिक पहले की योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें आती थीं, लेकिन अब नए प्रावधानों के जरिए पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि यह बदलाव गांवों के बुनियादी ढांचे, सड़कों, तालाबों, पंचायत भवनों और सामुदायिक केंद्रों के निर्माण से लेकर रोजगार सृजन तक प्रभाव डालेगा।
इसके साथ ही इस बिल का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है, जिससे गांवों में पलायन कम हो और लोग रोजगार की तलाश में शहरों पर निर्भर न रहें। राजनाथ सिंह का मानना है कि यह कानून प्रधानमंत्री मोदी के उस मॉडल का हिस्सा है, जिसमें गांवों, गरीबों और किसानों को विकास की मुख्यधारा में लाया जा रहा है और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक ठोस कदम है।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल: 65 एकड़ में बना राष्ट्रीय स्मारक और नेतृत्व का प्रतीक
लखनऊ में निर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल को सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का परिसर बताया है। लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्थल को 65 एकड़ भूमि पर विकसित किया गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह स्थान केवल स्मारक नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र है जो आने वाली पीढ़ियों को नेतृत्व, राष्ट्र सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देगा।
इस परिसर में तीन प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं — डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी — की 65 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। ये प्रतिमाएं भारत की राजनीतिक चेतना, राष्ट्र निर्माण और वैचारिक आधारों को दर्शाती हैं। राजनाथ सिंह ने बताया कि यह स्थल भारत की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक शक्ति और राष्ट्रीय आत्मसम्मान के प्रतीक के रूप में तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह परिसर सिर्फ देखने भर के लिए नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय चिंतन, प्रेरणा और सार्वजनिक भागीदारी का केंद्र बनेगा। इस कार्यक्रम को पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की जयंती पर आयोजित करना सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है जिसके तहत देश के नेताओं, प्रतीकों और मूल्यों को सम्मान दिया जा रहा है। सिंघ ने कहा कि यह प्रेरणा स्थल भारत के बदलते राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप का सजीव दस्तावेज है।
श्यामा प्रसाद, दीनदयाल और अटल जी की सोच से जुड़ी ‘अंत्योदय’ और राष्ट्रीय एकता की नीति
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में तीनों महान नेताओं के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की कई नीतियों की जड़ें इन्हीं सोच से निकलती हैं। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना जाता है, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन का बलिदान दिया। सिंह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण हुआ विज़न बताया।
इसी तरह पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय की विचारधारा — जहां समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे — को वर्तमान नीति-निर्माण का आधार बताया गया। सिंह ने कहा कि गरीबों के कल्याण, जन-धन योजना, उज्ज्वला गैस, आवास योजना और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं में दीनदयाल उपाध्याय की सोच छिपी है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में उन्होंने उनके हास्य, कद और राजनीतिक संतुलन को याद किया। पाकिस्तान दौरे का किस्सा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि अटल जी कठिन परिस्थितियों में भी सहजता और विनम्रता से जवाब देते थे। सिंह ने कहा कि अटल जी का योगदान राजनीति, विदेश नीति और सामाजिक एकता में अविस्मरणीय है।
भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान, विकास मॉडल और मोदी सरकार की नीति दिशा
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 10 सालों में भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक स्थिति दोनों में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को “ग्लोबल स्टेट्समैन” बताते हुए दावा किया कि दुनिया के 29 देशों ने उन्हें अपने राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा है। Singh के अनुसार आज दुनिया भारत की बात को गंभीरता से सुनती है, और भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक स्थिति में पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है, वैश्विक मंच पर भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है, और निवेश, रोजगार तथा तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर बने हैं। Singh ने इसे भारत की आत्मविश्वासी विदेश नीति, आंतरिक विकास मॉडल और बुनियादी ढांचे में सुधार का परिणाम बताया।
योगी आदित्यनाथ को प्रेरणा स्थल के निर्माण के लिए बधाई देते हुए उन्होंने दिवंगत मूर्तिकार राम सुतार को भी श्रद्धांजलि दी, जिनकी कला ने स्मारक को ऐतिहासिक रूप दिया। सिंह ने कहा कि इस स्थल और बिल के माध्यम से भारत उस दिशा की ओर बढ़ रहा है जहां शक्ति, एकता और आत्मनिर्भरता उसके मूल आधार होंगे।







