कनाडा में भारतीय मूल की महिला की हत्या, साथी पर शक; देशभर में गिरफ्तारी वारंट

कनाडा में भारतीय मूल की महिला की हत्या, साथी पर शक; पूरे देश में गिरफ्तारी वारंट जारी

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टोरंटो की सर्द रातें आमतौर पर शांत होती हैं, लेकिन 19 दिसंबर 2025 की वह रात शहर के इतिहास में एक और खौफनाक अध्याय जोड़ गई। भारतीय मूल की 30 वर्षीय महिला हिमांशी खुराना के अचानक लापता होने की सूचना जब पुलिस कंट्रोल रूम में दर्ज हुई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों में यह मामला एक जघन्य हत्या की कहानी बन जाएगा। यह सिर्फ एक अपराध नहीं था, बल्कि भरोसे, रिश्ते और प्रवासी जीवन की असुरक्षा को उजागर करने वाला एक दर्दनाक सच था।

उस रात करीब 10:40 बजे टोरंटो पुलिस को स्ट्रैचन एवेन्यू और वेलिंगटन स्ट्रीट वेस्ट इलाके से फोन आया। कॉल करने वाले की आवाज़ में घबराहट थी—एक युवती का कोई पता नहीं चल रहा था। शुरुआती तौर पर पुलिस ने इसे एक सामान्य गुमशुदगी का मामला माना। इलाके में तलाशी शुरू हुई, आस-पड़ोस से पूछताछ हुई, लेकिन रात गहराती चली गई और हिमांशी का कोई सुराग नहीं मिला।

अगली सुबह, 20 दिसंबर को करीब 6:30 बजे, पुलिस को एक घर के अंदर से जो सूचना मिली, उसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। उसी इलाके में स्थित एक आवासीय मकान के भीतर हिमांशी खुराना का शव बरामद हुआ। मौके का मंजर बता रहा था कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी हिंसा थी। कुछ ही देर में पुलिस ने मौत को हत्या घोषित कर दिया और जांच हत्याकांड यूनिट को सौंप दी गई।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी के परत-दर-परत खुलने लगे। पुलिस के मुताबिक हिमांशी और 32 वर्षीय अब्दुल गफूरी एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों टोरंटो में ही रहते थे और उनके बीच निजी संबंध थे। यही रिश्ता अब इस केस का सबसे अहम और सबसे डरावना पहलू बन गया। पुलिस को शक है कि यह मामला निजी संबंधों में उपजी हिंसा का है—वह हिंसा, जो अक्सर चार दीवारों के भीतर जन्म लेती है और बाहर आते-आते किसी की जान ले लेती है।

हिमांशी खुराना भारत से बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर कनाडा आई थीं। पढ़ाई, काम और एक सुरक्षित जीवन—यही उनका सपना था। परिचितों के मुताबिक वह मिलनसार, मेहनती और आत्मनिर्भर महिला थीं। लेकिन जिस व्यक्ति पर उन्होंने भरोसा किया, वही भरोसा उनकी मौत की वजह बन गया—ऐसा पुलिस का शुरुआती आकलन है।

हत्या के बाद से ही संदिग्ध अब्दुल गफूरी फरार है। टोरंटो पुलिस ने उसके खिलाफ प्रथम श्रेणी हत्या का मामला दर्ज करते हुए पूरे कनाडा में गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। पुलिस ने उसकी तस्वीरें सार्वजनिक की हैं और लोगों से अपील की है कि यदि किसी को उसके ठिकाने के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध को खतरनाक माना जा रहा है।

इस मामले ने टोरंटो में रह रहे भारतीय समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सामुदायिक बैठकों तक, हर जगह सिर्फ एक ही सवाल है—हिमांशी को आखिर न्याय कब मिलेगा? परिवार भारत में है, लेकिन बेटी की मौत की खबर ने उन्हें तोड़कर रख दिया है। दूर देश में हुए इस अपराध ने उनकी पीड़ा को और भी गहरा बना दिया है।

टोरंटो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। दूतावास ने साफ किया है कि वह परिवार के संपर्क में है और हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है। स्थानीय कनाडाई अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है, ताकि जांच में कोई ढिलाई न हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि यह टोरंटो में साल 2025 की 40वीं हत्या है। आंकड़े डराने वाले हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा डराने वाली है वह हकीकत, जो निजी रिश्तों में छिपी हिंसा को सामने लाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंटिमेट पार्टनर वायलेंस आज सिर्फ एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है—खासतौर पर प्रवासी समुदायों में, जहां लोग अक्सर अकेलेपन और मानसिक दबाव से जूझते हैं।

इस केस में भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। आखिर उस रात ऐसा क्या हुआ कि बात हत्या तक पहुंच गई? क्या पहले भी हिंसा के संकेत थे? क्या हिमांशी को मदद मिल सकती थी? पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है—फोन रिकॉर्ड, संदेश, और दोनों के बीच के संबंधों का इतिहास खंगाला जा रहा है।

हिमांशी की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है। यह उस डर की कहानी है, जो कई महिलाएं अपने निजी रिश्तों में महसूस करती हैं, लेकिन कह नहीं पातीं। यह उस भरोसे की कहानी है, जो टूटता है तो सबसे ज्यादा नुकसान उसी को होता है, जिसने भरोसा किया होता है।

अब पूरा टोरंटो पुलिस की अगली कार्रवाई की राह देख रहा है। क्या अब्दुल गफूरी जल्द गिरफ्तार होगा? क्या हिमांशी को इंसाफ मिलेगा? और क्या यह मामला समाज को यह सोचने पर मजबूर करेगा कि रिश्तों में हिंसा को नजरअंदाज करना कितनी बड़ी कीमत वसूल सकता है?

फिलहाल, हिमांशी खुराना की कहानी एक चेतावनी बन चुकी है—कि अपराध कभी अचानक नहीं होता, वह धीरे-धीरे पनपता है। और जब वह सामने आता है, तो पीछे सिर्फ खामोशी, आंसू और इंसाफ की उम्मीद छोड़ जाता है।

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