भारत में आध्यात्मिकता हमेशा से राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा रही है। नेताओं से लेकर उद्योगपतियों और वैश्विक तकनीकी दिग्गजों तक, देश के कई प्रभावशाली लोग समय-समय पर आध्यात्मिक गुरुओं की शरण में जाते रहे हैं। इसी कड़ी में सबसे चर्चित नामों में से एक है नीम करौली बाबा, जिन्हें उनके अनुयायी प्रेम से “महाराज जी” बुलाते हैं। बीते कुछ वर्षों में बाबा का नाम सिर्फ धार्मिक हलकों से निकलकर वैश्विक मीडिया, टेक जगत और भारतीय राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। कारण—दुनिया की छह अलग-अलग क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा में नीम करौली बाबा का गहरा प्रभाव है।
कैंची धाम का प्रभाव कैसे बना राजनीतिक-सामाजिक चर्चा का विषय?
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आश्रम न सिर्फ धार्मिक यात्रियों का केंद्र बना, बल्कि धीरे-धीरे यह “इन्फ्लुएंस एंड पावर हब” की तरह देखा जाने लगा। जब मार्क ज़करबर्ग और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उल्लेख किया, तब यह स्थान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो धार्मिक स्थल जब वैश्विक तकनीकी CEOs और राजनीतिक नेतृत्व के समीकरण में प्रवेश करते हैं, तो वह केवल आध्यात्मिक कहानी नहीं रह जाता—वह सामाजिक धारणा और सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा बन जाता है।
स्टीव जॉब्स: नीम करौली बाबा से जुड़ा अमेरिकी टेक इतिहास
एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 में भारत आए थे। उद्देश्य आध्यात्मिक उत्तर खोजने का था। हालांकि बाबा तब तक देह नहीं धारण करते थे, परन्तु आश्रम में उन्हें मिली शांति और वहां के अनुयायियों की सादगी ने जॉब्स के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। कहा जाता है कि स्टीव की “minimalism” व “simplicity” की फिलॉसफी कहीं न कहीं आश्रम से ही प्रेरित थी। एप्पल की डिजाइन फिलॉसफी में जो शांति और साफ-सुथरापन दिखता है, वह उनकी उस आध्यात्मिक यात्रा का परिणाम माना गया। यह वही कहानी है जिसे बाद में उन्होंने मार्क ज़करबर्ग को भी बताई—और यहीं से नीम करौली बाबा का नाम वैश्विक टेक्नोलॉजी राजनीति में प्रवेश करता है।
मार्क ज़करबर्ग: फेसबुक के CEO से कैंची धाम तक का सफर
स्टीव जॉब्स की सलाह के बाद मार्क ज़करबर्ग 2015 में भारत आए और कैंची धाम में कुछ समय बिताया। तब फेसबुक बड़े विवादों और आलोचनाओं से गुजर रहा था। ज़करबर्ग ने बाद में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्हें बाबा के आश्रम में मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता मिली। राजनीतिक रूप से यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह पहली बार था जब एक अमेरिकी CEO ने भारत के एक स्थानीय आध्यात्मिक केंद्र को वैश्विक नेतृत्व प्रभावित करने का स्रोत बताया। इस बयान ने भारतीय आध्यात्मिक ब्रांडिंग को एक नया आयाम दिया, जिसकी गूंज आज भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सुनाई देती है।
जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड की स्टार और भारतीय आध्यात्मिकता
ऑस्कर विजेता अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स भारत आईं और उन्होंने बाबा के अनुयायियों से प्रभावित होकर यहाँ की आध्यात्मिक विचारधारा अपनाई। जूलिया ने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारतीय आध्यात्मिक शिक्षाओं ने उन्हें मानसिक संतुलन और शक्ति दी। राजनीतिक-सांस्कृतिक दृष्टि से यह घटना महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे वैश्विक मनोरंजन जगत में भारतीय आध्यात्मिकता की नई छवि बनी। जहां पश्चिम पहले भारतीय अध्यात्म को “मिस्टिकल” मानकर देखता था, वहीं जूलिया जैसे सुपरस्टार्स ने इसे प्रतिष्ठा दी।

विराट कोहली: क्रिकेट स्टार की आध्यात्मिक ऊर्जा की खोज
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली 2018 में पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ कैंची धाम पहुंचे थे। कोहली ने कई बार कहा है कि आश्रम में बिताया समय उनके मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और संतुलन को सुधारने में मददगार रहा। खेल राजनीति के परिप्रेक्ष्य में भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं—एक राष्ट्रीय भावना है। जब 1.4 बिलियन लोगों की धड़कन माने जाने वाले विराट कोहली किसी आध्यात्मिक गुरु का नाम लेते हैं, तो उसका प्रभाव जनमानस और युवा विचारधारा पर गहरा पड़ता है। यही कारण है कि बाबा नीम करौली का नाम भारतीय युवा सांस्कृतिक विमर्श में तेजी से लोकप्रिय हुआ।
राम दास: पश्चिमी दुनिया में नीम करौली बाबा के विचारों के पहले राजदूत
अमेरिकी आध्यात्मिक गुरु राम दास (Richard Alpert) नीम करौली बाबा के सबसे प्रमुख शिष्यों में से रहे। उनकी किताब “Be Here Now” ने अमेरिका सहित दुनिया भर में भारतीय आध्यात्मिकता की लोकप्रियता को नई दिशा दी। राम दास ने जीवन भर बाबा के संदेशों को प्रचारित किया—करुणा, निस्वार्थ सेवा, प्रेम और समर्पण। वास्तव में वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय अध्यात्म को पश्चिम में शोध-आधारित आवाज दी। यह सांस्कृतिक कूटनीति का वह दौर था जब शीत युद्ध के समय भी भारतीय दर्शन अमेरिका में मिलेनियल्स और हिप्पी आंदोलन का आधार बना।
डेनियल गोलमैन: ‘Emotional Intelligence’ और बाबा की शिक्षाएं
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और लेखक डेनियल गोलमैन, जिन्होंने “Emotional Intelligence” जैसी अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर लिखी, वे भी युवावस्था में बाबा के आश्रम पहुंचे थे। गोलमैन बताते हैं कि बाबा से मिली आध्यात्मिक समझ ने उनके शोध और लेखन को गहराई दी। राजनीतिक नज़रिए से देखें तो गोलमैन का काम वैश्विक नीति-निर्माण, नेतृत्व प्रशिक्षण और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि जरूरी नहीं कि बाबा ने राजनीति पढ़ाई हो, लेकिन उनके अनुयायियों ने दुनिया की राजनीति और नीतियों को प्रभावित किया।

नीम करौली बाबा की शिक्षाएं आज के भारत की राजनीतिक और सामाजिक भाषा का हिस्सा क्यों बन रही हैं?
भारत की राजनीति में धर्म और अध्यात्म हमेशा से महत्वपूर्ण घटक रहे हैं। लेकिन नीम करौली बाबा के मामले में खास बात यह है कि उनके अनुयायी सिर्फ भारतीय राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं—वे वैश्विक निर्णयकर्ताओं में शामिल हैं। जब कोई धार्मिक स्थान प्रधानमंत्री, क्रिकेटर, हॉलीवुड स्टार और टेक दिग्गजों का साझा बिंदु बन जाए, तब वह स्थान केवल धार्मिक महत्व का नहीं रहता—वह soft power का प्रतीक बन जाता है। कैंची धाम आज उसी soft power का प्रतीक है।
भारत की आध्यात्मिक शक्ति का विश्व में बढ़ता प्रभाव
नीम करौली बाबा का नाम आज अमेरिका के सिलिकॉन वैली से लेकर भारत की चुनावी सभाओं तक चर्चा का विषय है। यह इस बात का संकेत है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत केवल प्राचीन धरोहर नहीं रही—वह वैश्विक राजनीति, टेक नेतृत्व, मनोरंजन और खेल के समीकरण में सक्रिय रूप से प्रभाव डाल रही है। जहां दुनिया में मानसिक तनाव, दिशाहीनता और अस्थिरता बढ़ रही है, वहीं बाबा जैसी हस्तियां लोगों को मानसिक शक्ति और मूल्य आधारित जीवन की ओर प्रेरित करती हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि नीम करौली बाबा का प्रभाव सिर्फ उनके भक्तों तक सीमित नहीं—यह प्रभाव विश्व राजनीति और सामाजिक विमर्श तक फैल चुका है।











