केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसी क्रम में देशभर के राज्यपालों के आधिकारिक आवास राजभवन का नाम ‘लोक भवन’ और केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ कर दिया गया है। यह परिवर्तन सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि सरकार के कामकाज और सार्वजनिक सेवा की प्राथमिकताओं में बदलाव का प्रतीक भी है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ये बदलाव प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक हैं। अब हर नाम, हर इमारत और हर प्रतीक यह स्पष्ट रूप से संकेत करेगा कि सरकार सत्ता से सेवा की ओर अग्रसर है। इससे यह संदेश भी मिलेगा कि भारतीय लोकतंत्र में सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का महत्व है।

PMO का नया रूप – ‘सेवा तीर्थ’
प्रधानमंत्री कार्यालय का नया कॉम्प्लेक्स एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-1 में वायु भवन के पास बनाया गया है। इसमें तीन नई आधुनिक इमारतें शामिल हैं:
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सेवा तीर्थ-1 – यह नई इमारत प्रधानमंत्री कार्यालय का नया घर बनेगी। यह कदम दशकों बाद साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय के स्थानांतरण का प्रतीक है।
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सेवा तीर्थ-2 – इस इमारत में कैबिनेट सचिवालय का कार्यालय होगा, जहां सरकार के बड़े निर्णय लिए जाते हैं।
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सेवा तीर्थ-3 – यह इमारत नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के कार्यालय के लिए है, जो देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को देखती है।
प्रधानमंत्री कार्यालय का यह शिफ्टिंग कार्य अब शुरू हो चुका है। हाल ही में, 14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने ‘सेवा तीर्थ-2’ में एक अहम बैठक की थी, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुख भी मौजूद थे। नई इमारतें आधुनिक सुविधाओं और हाई-टेक उपकरणों से लैस हैं। इससे सरकारी कामकाज में तेजी आएगी, फाइलें तेजी से निपटेंगी और निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने के पीछे मोदी सरकार का उद्देश्य केवल भौतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव लाना है। अधिकारियों के अनुसार, ये बदलाव सरकार की लोक-प्रधान और सेवा-केंद्रित मानसिकता को दर्शाते हैं।
सरकार ने इससे पहले राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया था और प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास का नाम 2016 में लोक कल्याण मार्ग रखा गया था। सरकारी अधिकारियों ने कहा, “हर नाम और प्रतीक अब एक सरल विचार की ओर इशारा करता है, सरकार सेवा के लिए है।” यह नाम न केवल कल्याण का बोध कराता है, बल्कि भविष्य में सरकार के कामकाज के मार्गदर्शन का प्रतीक भी है।
प्रशासनिक सुधार और आधुनिकता की दिशा
‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स की संरचना और डिजाइन आधुनिकता और कार्यकुशलता पर आधारित है। साउथ ब्लॉक से इस नए स्थान पर प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण यह दर्शाता है कि सरकार कार्यप्रणाली और नागरिक सेवा में सुधार की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
यह बदलाव केवल एक इमारत के नाम का परिवर्तन नहीं है, बल्कि भारत सरकार के काम करने के तरीके में नया अध्याय खोलता है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह कॉम्प्लेक्स सरकारी कामकाज को और अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और तेज बनाएगा।
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