Ayodhya Ramleela : अयोध्या के प्रसिद्ध भगवदाचार्य स्मारक सदन में चल रही रामलीला का समापन अत्यंत भक्तिभाव और उल्लासपूर्ण वातावरण में प्रभु श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक के साथ हुआ। बृहस्पतिवार की रात्रि में आयोजित इस अंतिम प्रसंग ने वहाँ उपस्थित अपार जनसमूह को सीधे त्रेतायुग के अलौकिक कालखंड की अनुभूति करा दी। जैसे ही मंच पर प्रभु श्रीराम का राजतिलक संपन्न हुआ, समूचा परिसर जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस मंचन के माध्यम से सत्य, करुणा और धर्म की अधर्म पर विजय के संदेश को बड़े ही भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने प्रत्येक भक्त के हृदय में रामराज्य की सुंदर परिकल्पना को साकार कर दिया।
राज्याभिषेक के पावन दृश्य में माता सीता, भ्राता लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ प्रभु राम का अत्यंत मनमोहक दरबार सजाया गया था। इस दिव्य झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी तथा रामलीला समिति के महासचिव एवं अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत संजय दास ने भगवान के स्वरूपों की विधि-विधान से आरती उतारी और राजतिलक की परंपरा को पूर्ण किया।
इस विशेष अवसर पर महंत संजय दास ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीला का यह अंतिम अध्याय केवल एक कथा का अंत नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक महान जीवन दर्शन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता का वास्तविक सौंदर्य या सामर्थ्य किसी स्वर्ण मुकुट या विशाल सिंहासन में निहित नहीं होता, बल्कि उसका असली मर्म जनकल्याण, निष्पक्ष न्याय, करुणा और निस्वार्थ कर्तव्यपालन में बसा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्श आज के दौर में भी मानव समाज को सत्य, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं।
इस गरिमामयी और पावन आयोजन में क्षेत्र के कई प्रमुख संत-महात्माओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। महंत अवधेश दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत शशिकांत दास, महंत हेमंत दास और शिवम श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। पूरी रामलीला के दौरान बना भक्तिमय वातावरण राज्याभिषेक के साथ अपनी चरम सीमा पर पहुँचा और सभी ने प्रभु के चरणों में नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।






