कानपुर में टैक्स चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक फर्जी पते पर फर्म बनाकर लाखों रुपये का जीएसटी हड़प लिया गया। पनकी क्षेत्र में फर्जीवाड़े का यह मामला उस समय सामने आया जब राज्य कर विभाग ने फर्म के पते की सत्यापन जांच की। जांच के दौरान पता चला कि जिस पते पर फर्म का पंजीकरण कराया गया था, वहां कोई फर्म मौजूद ही नहीं है। इससे अधिकारियों को टैक्स चोरी का शक पक्का हुआ और पूरा मामला उजागर हो गया।
राज्य कर विभाग की उपायुक्त सुषमा सिंह के अनुसार, नेहरू नगर निवासी अनुराग शुक्ला ने पनकी की कांशीराम कॉलोनी के एक फर्जी पते पर मारुति ट्रेडर्स नाम की फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया था। कागज़ों में यह फर्म पूरी तरह वैध दिखाई दे रही थी, लेकिन हकीकत में इसका कोई अस्तित्व नहीं था।
फर्म द्वारा वर्ष 2022–23 के दौरान लगभग 3 करोड़ 8 लाख 94 हजार रुपये का टर्नओवर दिखाया गया। यह एक छोटे व्यापारी के लिए बड़ा टर्नओवर माना जाता है। लेकिन असल समस्या तब सामने आई जब फर्म ने इस व्यापार पर लागू 55 लाख 60 हजार रुपये का जीएसटी जमा नहीं किया।
टैक्स जमा न होने को लेकर विभाग ने जब जांच की प्रक्रिया शुरू की, तो अधिकारियों ने दिए गए पते पर जाकर सत्यापन किया। मौके पर देखा गया कि वहां फर्म का कोई बोर्ड, दुकान, या गतिविधि तक नहीं थी। पड़ोसियों को भी इस नाम की कोई फर्म या व्यापारी के बारे में जानकारी नहीं थी। यही सबसे बड़ा सबूत था कि फर्म सिर्फ दस्तावेजों में बनाई गई थी।
राज्य कर विभाग ने दर्ज कराई एफआईआर
जब टैक्स चोरी की पुष्टि हो गई, तो राज्य कर विभाग की उपायुक्त सुषमा सिंह ने इस फर्जी फर्म के प्रोपराइटर अनुराग शुक्ला के खिलाफ पनकी थाने में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। तहरीर दर्ज होते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी।
पनकी थाना प्रभारी मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस फर्जी फर्म के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग किया गया था या अन्य फर्मों को भी इससे लाभ पहुंचाया गया था।
यह मामला केवल एक फर्जी फर्म का नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में बढ़ रही जीएसटी धोखाधड़ी का भी उदाहरण है। फर्जी पते, काल्पनिक फर्में और कागजी व्यापार दिखाकर टैक्स चोरी करने का यह चलन जीएसटी लागू होने के बाद तेजी से बढ़ा है। ऐसे मामलों में सरकार को न केवल टैक्स का घाटा होता है, बल्कि ईमानदार व्यापारियों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी करना अब संगठित अपराध का रूप लेता जा रहा है। कई मामलों में देखा गया है कि एक ही व्यक्ति या समूह कई फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी लेन-देन दिखाता है और लाखों रुपये की जीएसटी चोरी कर लेता है।
क्या है जीएसटी अधिकारियों का अगला कदम?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीएसटी विभाग इस फर्जी फर्म से जुड़ी हर गतिविधि का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि:
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फर्म से जुड़े बैंक खातों की जांच होगी
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सप्लायर और खरीदारों की लिस्ट की पड़ताल की जाएगी
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क्या इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत उपयोग हुआ, इसका विश्लेषण किया जाएगा
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आरोपी से पूछताछ कर पता लगाया जाएगा कि क्या इसमें कोई और लोग भी शामिल हैं
यदि टैक्स चोरी की पुष्टि होती है, तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसमें भारी जुर्माना, टैक्स की वसूली, और गंभीर मामलों में जेल तक की सजा का प्रावधान है।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा है। कई व्यापारी कहते हैं कि ऐसे फर्जी लोग व्यापार क्षेत्र की विश्वसनीयता खराब करते हैं और सही व्यापार करने वालों की छवि पर असर डालते हैं।
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