बिहार चुनाव 2025 में जन सुराज की परीक्षा का दिन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों का इंतजार खत्म होने लगा है और शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि चुनाव इस बार कई दिग्गजों के लिए निराशा लेकर आया है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP), जिसने बड़े पैमाने पर चुनावी तैयारी की थी, रुझानों में कहीं भी प्रभाव नहीं दिखा पा रही है।
6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए चुनाव में राज्य की 243 सीटों पर मतदान सम्पन्न हुआ। 2600 से ज्यादा उम्मीदवारों ने मैदान में किस्मत आजमाई, जिनमें जन सुराज के 200 से अधिक उम्मीदवार भी शामिल थे। लेकिन शुरुआती रुझानों ने पार्टी समर्थकों को निराश कर दिया है।
जन सुराज पार्टी के नेताओं को लेकर राज्यभर में बड़ी उम्मीदें थीं, खासकर पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर की रणनीति पर लोगों की निगाहें टिकी थीं। लेकिन शुरुआती गणना के दौर में पार्टी को किसी सीट पर बढ़त मिलती नहीं दिख रही है।
चनपटिया विधानसभा सीट से जन सुराज के प्रत्याशी मनीष कश्यप पीछे चल रहे हैं। वहीं, करगहर सीट से पार्टी के चर्चित उम्मीदवार रितेश पांडेय भी हार की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों नामों को लेकर उत्साह था, मगर जनता का जनादेश जन सुराज के पक्ष में नहीं झुका है।
जन सुराज पार्टी ने इस चुनाव में जनता के बीच “नीतिनिर्धारित राजनीति” और विकास आधारित अभियान पर जोर दिया था। प्रशांत किशोर ने राज्य के जिलों में व्यापक प्रचार यात्राएं कीं और विभिन्न सामाजिक समूहों से लगातार संपर्क बनाए रखा। इसके बावजूद, पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज को संगठनात्मक मजबूती की कमी और क्षेत्रीय समीकरणों की गलत समझ का खामियाजा उठाना पड़ा। जबकि अन्य दलों जैसे राजद, जदयू और भाजपा के गठजोड़ ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को सुरक्षित रखा।
यदि प्रशांत किशोर अपने संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत कर पाते हैं, तो भविष्य में जन सुराज पार्टी बिहार की राजनीति में एक वैकल्पिक शक्ति बन सकती है। फिलहाल, परिणामों के रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि 2025 के चुनाव में यह पार्टी राज्य की सत्ता से कोसों दूर है।
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