गयाजी (बिहार): (चुनाव आयोग) चुनावी पारदर्शिता की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल को राजनीतिक दलों से लेकर आम मतदाताओं तक, सबकी निगाहों में एक अहम सुधार के रूप में देखा जा रहा है। सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह कदम राजनीति में “पवित्रता और पारदर्शिता” बनाए रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
मांझी ने कहा, “हम देश भर में SIR की मांग कर रहे हैं क्योंकि इससे पारदर्शिता आएगी। राजनीति में पवित्रता के लिए यह बेहद जरूरी है।” मांझी का बयान उस समय आया जब आयोग ने देशभर के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को अपने-अपने राज्यों में मतदाता सूची की अंतिम समीक्षा करने के निर्देश दिए।
वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम और मृत व्यक्तियों का हटना जरूरी: नीरज कुमार
जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नामों और मृत व्यक्तियों के नामों को हटाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को शुद्ध करने का कार्य है।”
नीरज कुमार ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने SIR का विरोध किया, लेकिन न्यायपालिका ने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे इस प्रकार की प्रक्रिया चलाने का पूर्ण अधिकार है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि गलत और दोहराए गए नामों के कारण मतदान प्रक्रिया में भ्रम और फर्जी वोटिंग जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं, जिन्हें SIR जैसी पहल से सुधारा जा सकता है।
दिल्ली में चुनाव आयोग की अहम बैठक, राज्यों से हुई एक-एक कर समीक्षा
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। यह बैठक इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल मैनेजमेंट (IIIDEM) में संपन्न हुई।
इस दौरान आयोग ने पहले दिए गए निर्देशों की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक राज्य में मतदाता सूची का अद्यतन कार्य तेजी से और निष्पक्ष तरीके से पूरा हो। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी राज्यों के CEOs ने अपनी तैयारियों की जानकारी दी।
आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने SIR प्रक्रिया पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया, जिसके बाद विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े सवाल पूछे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार SIR प्रक्रिया डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर सख्ती से लागू की जाएगी ताकि कोई त्रुटि न रह जाए।
SIR से कैसे बदलेगी चुनावी पारदर्शिता की तस्वीर
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को पूरी तरह से दोबारा जांचा जाता है। इसमें नए वोटरों का पंजीकरण, पुराने या मृत व्यक्तियों के नामों को हटाना और गलत प्रविष्टियों को सुधारना शामिल है।
आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी वोटिंग, नामों की पुनरावृत्ति और अन्य तकनीकी गड़बड़ियों को दूर किया जा सकेगा। इसके अलावा, यह आम मतदाताओं के विश्वास को भी मजबूत करेगा कि उनकी वोट की अहमियत सुरक्षित और निष्पक्ष है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। कई राज्यों में पिछले चुनावों के दौरान वोटर लिस्ट को लेकर उठे सवालों के बाद SIR को एक ठोस सुधार के रूप में देखा जा रहा है।







