VD Satheesan new CM: केरलम की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जो सस्पेंस चल रहा था, वह आखिरकार गुरुवार को खत्म हो गया। चुनाव नतीजे आने के बाद से ही हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि राज्य की कमान किसके हाथ में होगी? लंबी खींचतान और बैठकों के दौर के बाद कांग्रेस हाईकमान ने अपना फैसला सुना दिया है।
चलिए जानते हैं कि कौन हैं केरलम के नए मुख्यमंत्री और कैसे उन्होंने इस रेस में बाजी मारी।
केरलम में खत्म हुई मुख्यमंत्री पद की जद्दोजहद
केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को ही आ गए थे, जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 140 में से 102 सीटों पर जीत हासिल की। जीत तो मिल गई, लेकिन असली चुनौती थी मुख्यमंत्री का चयन करना। पिछले 10 दिनों से पार्टी के अंदर काफी मंथन चल रहा था।
मुख्यमंत्री की इस रेस में मुख्य रूप से तीन बड़े नाम शामिल थे—केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और VD Satheesan। तीनों ही नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को कुर्सी पर देखना चाहते थे। आखिरकार, कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी ने घोषणा की कि राज्य की बागडोर अब सतीशन के हाथों में होगी।

कौन हैं परावूर के विधायक वीडी सतीशन?
अगर आप केरलम की राजनीति को करीब से देखते हैं, तो आप जानते होंगे कि VD Satheesan कोई नया नाम नहीं हैं। वह एर्नाकुलम जिले की परावूर सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं। सतीशन ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 के दशक में छात्र राजनीति से की थी। वह केरल स्टूडेंट्स यूनियन और यूथ कांग्रेस के सक्रिय सदस्य रहे हैं।
पार्टी के भीतर उनकी छवि एक बहुत ही सुलझे हुए और आक्रामक वक्ता की रही है। 2021 से 2026 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने जिस तरह से सरकार को घेरा, उसने कांग्रेस हाईकमान को काफी प्रभावित किया। शायद यही वजह है कि अनुभवी नेताओं की मौजूदगी के बावजूद VD Satheesan पर भरोसा जताया गया।

एकजुटता का संदेश और सहयोगियों का साथ
नए मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है। सीएम पद की रेस में शामिल रहे दिग्गज नेता के.सी. वेणुगोपाल ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि केरलम की जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि VD Satheesan के नेतृत्व वाली सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।
केरलम में इस बार UDF की जीत के साथ ही एलडीएफ (LDF) के 10 साल के शासन का भी अंत हो गया है। इस गठबंधन में कांग्रेस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), आरएसपी (RSP) और केरल कांग्रेस जैसे दल शामिल हैं, जो अब मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करेंगे।
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नई सरकार के सामने चुनौतियां
राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। VD Satheesan के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही कांग्रेस को जनता को यह दिखाना होगा कि उनका फैसला सही था। सतीशन की संगठन पर मजबूत पकड़ और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता निश्चित रूप से सरकार चलाने में उनके काम आएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि VD Satheesan अपनी कैबिनेट में किन चेहरों को जगह देते हैं और गुटबाजी को दूर रखकर कैसे सभी को साथ लेकर चलते हैं।
केरलम की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। VD Satheesan का मुख्यमंत्री बनना न केवल एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि यह कांग्रेस की उस नई रणनीति का हिस्सा है जहाँ अनुभव के साथ-साथ सक्रियता और प्रदर्शन को तवज्जो दी जा रही है। अब सबकी नजरें सतीशन के शपथ ग्रहण समारोह और उनकी भविष्य की योजनाओं पर टिकी हैं।
