UP: शुरू हुआ स्कूली बसों की फिटनेस का बड़ा अभियान, अभिभावक भी ऑनलाइन चेक कर सकेंगे पूरी कुंडली

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उत्तर प्रदेश के अभिभावकों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए एक बहुत ही राहत भरी और जरूरी खबर सामने आई है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे UP में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले डग्गामार या बिना फिटनेस वाले वाहनों को अब सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगले 15 दिनों तक चलने वाला यह विशेष अभियान प्रदेश के हर जिले में सख्ती से लागू किया जा रहा है।

पूरे UP में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक सभी स्कूली बसों और वैन की गहन जांच की जाएगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल में चलने वाला हर वाहन पूरी तरह से फिट हो। परिवहन विभाग की टीमें स्कूल-स्कूल जाकर वाहनों के रजिस्ट्रेशन, बीमा, परमिट और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की जांच करेंगी। UP सरकार के निर्देशानुसार, अगर किसी भी वाहन में तकनीकी खामी या दस्तावेजों की कमी पाई जाती है, तो उसकी फिटनेस तुरंत निरस्त कर दी जाएगी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

डिजिटल पोर्टल और नई सुविधाएं

तकनीक के इस दौर में UP सरकार ने निगरानी को और भी पुख्ता बनाने के लिए ‘यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल’ (UP-ISVMP) को लाइव कर दिया है। अब परिवहन विभाग, स्कूल प्रबंधन और पुलिस एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहेंगे। इस पोर्टल की सबसे खास बात यह है कि इसमें UP के अभिभावकों के लिए “Know Your Bus” नाम का एक फीचर दिया गया है। इसके जरिए आप घर बैठे अपने बच्चे की स्कूल बस का नंबर डालकर उसकी फिटनेस, ड्राइवर का विवरण और बीमा स्टेटस चेक कर सकते हैं।

स्कूल प्रबंधन की बढ़ेगी जिम्मेदारी

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब यूपी के सभी स्कूल प्रबंधकों को अपने यहां चलने वाले वाहनों का पूरा डेटा डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। केवल अभियान के दौरान ही नहीं, बल्कि इसके बाद भी जिला स्तर की समितियां इन वाहनों पर नजर रखेंगी। यूपी प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

देखा जाए तो यूपी में शुरू हुआ यह सुरक्षा अभियान समय की मांग थी। अक्सर पुरानी और जर्जर बसों के कारण बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता था, लेकिन अब डिजिटल पोर्टल और सख्त चेकिंग से इसमें पारदर्शिता आएगी। UP के हर नागरिक और अभिभावक को भी इस मुहिम में सहयोग करना चाहिए और अगर कोई वाहन असुरक्षित दिखे, तो उसकी शिकायत जरूर करनी चाहिए। सुरक्षा के प्रति यह जागरूकता ही हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाएगी। आप भी पोर्टल पर जाकर अपने बच्चे की बस की जानकारी जरूर चेक करें।

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