चंद रुपयों के लिए देश से गद्दारी: पाकिस्तान को सैन्य ठिकानों की फोटो भेजने वाले 9 जासूस गिरफ्तार, रील बनाने के बहाने करते थे जासूसी

Share This Article

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और मेरठ क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने जासूसी के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा महकमे में खलबली मचा दी है। एसआईटी (SIT) की टीम ने 20 मार्च को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जो सरहद पार पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भारतीय सैन्य ठिकानों की बेहद संवेदनशील जानकारियां मुहैया करा रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस देशद्रोही काम के बदले इन आरोपियों को महज 500 से 5000 रुपये तक का लालच दिया जाता था। गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तर प्रदेश और बिहार के युवक शामिल हैं, जो तकनीक का सहारा लेकर देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे थे।

रील बनाने के बहाने ‘हनीट्रैप’ और जासूसी का खेल

जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस गिरोह में शामिल पांच आरोपी नाबालिग हैं। ये नाबालिग लड़के सैन्य छावनियों और प्रतिबंधित क्षेत्रों के आसपास ‘शॉर्ट वीडियो’ या रील बनाने का नाटक करते थे। इसी बहाने वे सैन्य ठिकानों, उनके प्रवेश द्वारों और संवेदनशील इमारतों की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेते थे। एडीसीपी राजकरन नैय्यर के अनुसार, ये सभी आरोपी पाकिस्तान में बैठे ‘सरदार उर्फ सरफराज उर्फ जोगा सिंह’ नामक व्यक्ति के सीधे संपर्क में थे। सूचनाएं साझा करने के लिए ‘संदेश’ जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।

500 रुपये की किस्तों में बिक रहा था देश का ईमान

पकड़े गए आरोपियों की पहचान मेरठ के परतापुर निवासी गणेश, शास्त्री नगर के गगन कुमार और बिहार के पूर्णिया के विवेक के रूप में हुई है। इसके अलावा जौनपुर के शाहगंज निवासी दुर्गेश भी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। पूछताछ में पता चला कि पाकिस्तान से मिलने वाली रकम बहुत छोटी होती थी—कभी 500 तो कभी 5000 रुपये। इस पैसे के लेनदेन के लिए भी शातिर तरीका अपनाया गया था। आरोपी सीधे अपने खाते में पैसे न मंगाकर ‘जन सेवा केंद्रों’ पर इंटरनेट बैंकिंग के जरिए भुगतान कराते थे और वहां से नकद रुपये लेते थे। यह सब इसलिए किया जाता था ताकि बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए उनकी पहचान उजागर न हो सके।

दो मुख्य सरगना अब भी फरार, एसआईटी की छापेमारी जारी

एसआईटी की इस कार्रवाई ने एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है, लेकिन इस मामले के दो मुख्य किरदार अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस को बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी नौशाद अली और भागलपुर के रहने वाले समीर उर्फ ‘शूटर’ की सरगर्मी से तलाश है। माना जा रहा है कि ये दोनों ही इस जासूसी रैकेट की मुख्य कड़ी हैं और युवाओं को पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेलते थे। एडीसीपी ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। – डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

Are You Satisfied DD News UP

Also Read This